वीर हकीकत राय (61 Views)

पंजाब के सियालकोट मे जन्में वीर हकीकत राय जन्म से ही कुशाग्र बुद्धि के बालक थे। यह बालक 4-5 वर्ष की आयु मे ही इतिहास तथा संस्कृत आदि विषय का पर्याप्त अध्ययन कर लिया था।

10 वर्ष की आयु मे फारसी पढ़ने के लिये मौलबी के पास भेजा गया, वहॉं के मुसलमान छात्र हिन्दू बालको तथा हिन्दू देवी देवताओं को अपशब्द कहते थे। बालक हकीकत उन सब के कुतर्को का प्रतिवाद करता और उन मुस्लिम छात्रों को वाद-विवाद मे पराजित कर देता।
वीर हकीकत राय के पढ़ाई में अच्छे होने के कारण मुस्लिम बालक उनसे ईर्ष्या करते थे। एक दिन माँ दुर्गा की सवारी निकल रही थी और मुस्लिम बालकों ने माँ दुर्गा को अपशब्द कहे । इस बात पर वीर हकीकत राय ने कहा कि अगर यही शब्द अगर मैं मोहम्द की पुत्री फातिमा के बारे में कहूँ तो कैसा लगेगा ?

इस बात पर मुस्लिम बालकों ने मौलवी को झूठी शिकायत कर दी की हकीकत राय ने फातिमा को अपशब्द कहे है।यह बाद सुन कर मौलवी बहुत नाराज हुऐ और हकीकत राय को शहर के काजी के सामने प्रस्तुत किया।

बालक के परिजनो के द्वारा लाख सही बात बताने के बाद भी काजी ने एक न सुनी और निर्णय सुनाया कि शरह** के अनुसार इसके लिये सजा-ए-मौत है या बालक मुसलमान बन जाये। माता पिता व सगे सम्बन्धियों के कहने के यह कहने के बाद की मेरे लाल मुसलमान बन जा तू कम से कम जिन्दा तो रहेगा। किन्तु वह बालक आने निश्चय पर अडि़ग रहा और बंसत पंचमी सन 1734 करे जल्लादों ने उसे फॉंसी दे दी, इस प्राकर एक 15 वर्ष का बालक हिन्दू धर्म के लिए शहीद हो गया
ओर शहीद होते समय बोले माँ मुझे मरना पसंद है ,
पर माथे से तिलक हटाना पसंद नही ।

अमर शहीद वीर हकीकत राय जी को शत शत नमन।

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