केरल में गाये को सरेआम काटना (311 Views)

भगवान, अर्जुन को पूरी गीता में हिंसा और युद्ध में फ़र्क़ बताते रहे । हिंसा एक मानसिक स्थिति है, ग़लत है और विनाशकारी है, युद्ध एक व्यवहारिक स्थिति है और यदि धर्म स्थापना के लिए किया जाए तो सत्य है, और कल्याणकारी है । इसलिए, रणचंडी के पुत्रों को हिंसा के तो नहीं पर युद्ध के लिए सदैव तैयार रहना पड़ेगा । जिस धर्म में लोग पहली रोटी गौमाता के लिए रखते हैं, उसी देश के कांग्रेसी, पहली रोटी से गाय ही खा गए। ये केवल गाये को नही काटा गया है ये काटा गया १०० करोड़ हिन्दुओं को तथा उनकी आस्थाओं को|अब तो तथाकथित हिन्दुओं की पार्टी से भी भरोसा उठता जा रहा है|

 

मुस्लिमों के मुद्दों पर मुखर होकर बोलने वाले प्रधानमंत्री हिंदुओं के उत्पीड़न पर चुप्पी साध लेते हैं। गौ-रक्षकों को गुंडा और असामाजिक तत्व बताने वाले PM के मुँह से गौ हत्यारों के खिलाफ एक शब्द न निकला। संगठित न होने का इससे भयंकर दुष्परिणाम और क्या होगा |

 

गौमाता को सरेराह काटने वाले यदि मिट नहीं गये तो कहना | मोदी विरोध में गाय को काटना जो अपना अधिकार समझते हैं , वो सिर्फ हिंदुओं को उनकी औकात दिखा रहे हैं  | जो करना है करलो , हम हिन्दुओं के इस देश में खुलेआम हिन्दुओं की आस्थाओं को मिटाते रहेंगे | अब तो शर्म आती है हिन्दुओं की सोच पर अभी जो अपने धर्म के इतने बड़े अपमान को देख भी रहा है और चुप भी है तथा कोई प्रतिक्रिया करने की क्षमता भी खोता जा रहा hai|

 

हिन्दुओं को यह समझना होगा की ये केवल मोदी विरोध नही है ये धीऱे धीऱे हिन्दुओं का उन्ही के देश से निष्कासन है|हिन्दू कशमीर से खदेड़ दिए गए , अब केरल में भी लगभग हिन्दू खत्म होते जा रहे हैं| वो दिन दूर नही जब केरल में भी कशमीर जैसा हाल होगा | पश्चिम बंगाल तो बांग्लादेश बनता ही जा रहा है वहां हिन्दू दूसरी श्रेणी के तो बन ही गए हैं | ना
कोई भी अधिकारी हिन्दुओं की सुनता और ना ही सरकार उनकी सुनती है | हिंदुयों के त्योहारों पे रोक लगा दी जाती है |

 

ये केवल गाये को काटने का मामला नही है ये मामला है हिन्दुओं को उन्ही के देश से बाहर करने का ये मामला है सभी सनातनी धारणाओं को धत्ता बताने का|अगर इस मामले को हिन्दुओं ने पेहले की तरह जाने दिया तो आने वाले समय में हिन्दुओं के विरुद्ध होने वाले अपराध किस हद तक जायेंगे आप उसकी कल्पना भी नही कर सकते

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