वीर माधवराव पेशवा


भारत के पेशवा बामनों की वीर गाथाएं महान और आत्मा में बिजली सी पैदा कर देने वाली हैं। ऐसा महान इतिहास शायद ही विश्व में किसी अन्य जाति का रहा हो जैसा की पेशवा ब्राह्मणों का। बाजीराव पेशवा, नाना साहेब पेशवा, श्रीमन्त पेशवा, सदाशिव राव पेशवा और कई अन्य।पानीपत की लड़ाई हो या दिल्ली का युद्ध। मुगलों से लोहा लेने वाले महावीर यही थे। यह ऐसे महावीर थे की इतिहास इनके शौर्य पर गर्व करता है।

ऐसे ही एक वीर हुए माधव राव पेशवा। जिस समय मुगल साम्राज्य ने भारत के अधिकांश स्थल पर कब्ज़ा कर लिया था और भारत की पवित्र ब्रज भूमि (मथुरा, वृन्दावन, गोकुल, बरसाना ) आदि सब मुगलों के कब्ज़े में था तब माधवराव पेशवा ने कसम खाई की वो ब्रज को मुसलमानों के कब्ज़े से आज़ाद करवाएंगे। माधवराव अपनी सेना लेकर बृज पर भगवा फहराने को निकल पड़े। उस समय मुग़ल मथुरा में श्रीकृष्ण भूमि को कब्जाए बैठे थे। आधा मंदिर तोड़ दिया गया था श्रीराम जन्मभूमि की तरह बाकी आधा भी तोड़ दिया जाता। पर पेशवा आक्रमण की खबर सुनकर मुगल घबरा गए। युद्ध हुआ। अपनी विशाल सेना होने के बावजूद माधवराव की वीरता के आगे मुगलों का झण्डा झुक गया। माधवराव ने पुरे बृज से मुसलमानों को मार भगाया और हिंदुओं को उनके धर्म स्थल वापिस दिलवाये। उनकी इसी जीत की ख़ुशी में पुरे महाराष्ट्र में जन्माष्टमी पर दही हांडी का पर्व मनाया गया जो प्रथा आज भी जारी है।

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