Dated:- February 13, 2017

Posted in:- Vichaar

Posted By:- Anonymous

Views:- 520 Views

Comments:-  0 comments

वैलेंटाइन डे युवाओं का एक दिवालियापन

प्रेम शब्दों का मोहताज़ नही होता प्रेमी की एक नज़र उसकी एक मुस्कुराहट सब बयां कर देती है, प्रेमी के हृदय को तृप्त करने वाला प्रेम ईश्वर का ही रूप है| एक शेर मुझे याद आता है की…. “बात आँखों की सुनो दिल में उतर जाती है जुबां का क्या है ये कभी भी मुकर […]

Continue reading >>

Dated:- February 7, 2017

Posted in:- Vichaar

Posted By:- Anonymous

Views:- 536 Views

Comments:-  0 comments

राम केवल एक चुनावी मुद्दा नही हमारे आराध्य है

राम केवल चुनावी मुद्दा नही बल्कि हमारे आराध्य होने के साथ-साथ हमारे गौरव का प्रतीक है | ये देश जो राम के आदर्शों का साक्षी रहा है ये अयोध्या जहां राम ने अपने जीवन आदर्शों के लिए न केवल कष्ट सहे बल्कि मनुष्यत्व के श्रेष्ठ गुणों को उसके चरम तक पहुँचाया वो राम आज केवल […]

Continue reading >>

Dated:- February 1, 2017

Posted in:- Vichaar

Posted By:- Anonymous

Views:- 483 Views

Comments:-  0 comments

वाणी की देवी वीणापाणी और उनके श्री विगृह का मूक सन्देश

वसंत को ऋतुराज राज कहा जाता है पश्चिन का भूगोल हमारे देश में तीन ऋतुएं बताता है जबकि भारत के प्राचीन ग्रंथों में छ: ऋतुओं का वर्णन मिलता है उन सभी ऋतुओं में वसंत को ऋतुराज कहा जाता है भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है की प्रथ्वी पर जो भी दृव्य पदार्थ पाए […]

Continue reading >>

Dated:- January 11, 2017

Posted in:- Vichaar

Posted By:- Anonymous

Views:- 515 Views

Comments:-  0 comments

विश्वेश्वर से स्वामी विवेकानंद बनने तक की यात्रा (जन्म जयन्ती विशेष)

आज 12 जनवरी 2017 में हम स्वामी विवेकानंद की 154 वी जन्म जयन्ती मना रहे है| जिसे हम युवा दिवस के रूप में जानते है| आज से 154 वर्ष पूर्व एक बालक का जन्म हुआ जिसका नाम विश्वेश्वर रखा गया जिसे घर में प्यार से नरेंद्र के नाम से बुलाया जाता था | लेकिन ये […]

Continue reading >>

Dated:- December 13, 2016

Posted in:- Vichaar

Posted By:- Anonymous

Views:- 747 Views

Comments:-  0 comments

श्रेष्ट विद्यार्थी और गौरवशाली राष्ट्र

विद्यार्थी जीवन मनुष्य के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है | इस समय में बने संस्कार, सीखी हुई कलाएँ हमारा भविष्य निर्धारित करती हैं | इसलिए यह बहुत जरूरी हो जाता है कि मनुष्य अपने विद्यार्थी जीवन से ही देश के प्रति अपने कर्तव्यों को समझे | इससे वह अपने जीवन को इस प्रकार […]

Continue reading >>

Dated:- November 16, 2016

Posted in:- Vichaar

Posted By:- Anonymous

Views:- 637 Views

Comments:-  0 comments

धन उपार्जन और आपका विवेक (पंकज “प्रखर”)

धन उपार्जन और आपका विवेक पंकज “प्रखर” पिछले दिनों अमीरी को इज्जत का माध्यम माना जाता रहा है। इज्जत पाना हर मनुष्य की स्वाभाविक इच्छा है। इसलिये प्रचलित मान्यताओं के अनुसार हर मनुष्य अमीरी का इच्छुक रहता है, ताकि उसे दूसरे लोग बड़ा आदमी समझें और इज्जत करें। अमीरी सीधे रास्ते नहीं आ सकती। उसके […]

Continue reading >>

Dated:- October 14, 2016

Posted in:- Uncategorized

Posted By:- Anonymous

Views:- 5075 Views

Comments:-  0 comments

विद्यार्थी जीवन में माता पिता की भूमिका, लेखक:- पंकज”प्रखर”

विद्यार्थियों के जीवन में सबसे बड़ी भूमिका में होते है मात पिता ये उनकी नैतिक जिम्मेदारी है की वे अपने बच्चों को नकारात्मक विचारों से बचाएं और अपने स्नेह एवं मार्गदर्शन से उनमे आत्मविश्वास का दीपक प्रज्वलित करें और उन्हें आश्वस्त करें की अगर वे अपनी इच्छानुसार सफलता नही भी प्राप्त कर पाए या पूरी […]

Continue reading >>

Dated:- September 30, 2016

Posted in:- Vichaar

Posted By:- Vicky Sharma

Views:- 802 Views

Comments:-  0 comments

अजित कुमार डोभाल

चाणक्य जैसा दिमाग और बाजीराव जैसा हौंसला। असली जिंदगी का james bond। IPS अजित कुमार डोभाल जो भारत के 6 साल जासूस रहे पाकिस्तान में। भारत के बदलते और खूंखार होते रुख के पीछे का mastermind। इनके बारे में कुछ ख़ास बातें : * 1945 में एक गढ़वाली ब्राह्मण परिवार में जन्म। पिता आर्मी में […]

Continue reading >>

Dated:- September 24, 2016

Posted in:- Vichaar

Posted By:- Pankaj Sharma

Views:- 991 Views

Comments:-  0 comments

व्यक्तित्व का निर्माण करते हमारे विचार लेखक:- पंकज”प्रखर” कोटा (राज.)

इस लेख का प्रारम्भ तुलसी बाबा की एक चौपाई से करता हूँ “जाकी रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखि तिन तेसी” इस चौपाई का सार सीधे शब्दों में ये है की मनुष्य जैसा सोचता है वैसी ही सृष्टि का निर्माण वो अपने आस-पास करने लगता है| संसार में अनेक प्रकार के जीव पाए जाते है,जिनमे […]

Continue reading >>

Dated:-

Posted in:- Vichaar

Posted By:- Pankaj Sharma

Views:- 1102 Views

Comments:-  0 comments

विद्यार्थियों के अवसाद का कारण परिवार और समाज लेखक :- पंकज “प्रखर” कोटा (राज.)

प्राचीन समय के मनीषियों से लेकर वर्तमान समय के दार्शनिको तक के विचारों को पड़ा जाए तो एक ही निचोड़ सामने आता है , समाज की भावी पीढ़ी (विद्यार्थी) किसी भी देश की मजबूत आधार शिला एवं पूंजी होती है | यदि किसी देश को हानि पहूँचानी हो तो वहां की शिक्षा प्रणाली में सेंध […]

Continue reading >>

Popular Articles