Category: Personalities

Indian Personalities

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श्री जगतगुरु आदि शंकराचार्य

आदि शकराचार्य आदि शंकराचार्य जी के पिता शिव गुरु जी तैत्तिरीय शाखा के यजुर्वेदी ब्राह्मण थे । उनके विवाह के कई वर्ष बाद भी उनकी से सन्तान नहीं हुई । उन्होंने अपनी पत्नी के...

Peshva Bajirao 0

पेशवा बाजीराव की दिल्ली विजय

सवाल है कि क्या था शिवाजी का वो सपना, जिसे बाजीराव बल्लाल भट्ट ने पूरा कर दिखाया? दरअसल जब औरंगजेब के दरबार में अपमानित हुए वीर शिवाजी आगरा में उसकी कैद से बचकर भागे...

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वीर माधवराव पेशवा

भारत के पेशवा बामनों की वीर गाथाएं महान और आत्मा में बिजली सी पैदा कर देने वाली हैं। ऐसा महान इतिहास शायद ही विश्व में किसी अन्य जाति का रहा हो जैसा की पेशवा...

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लोकमान्य तिलक

1894 मे अंग्रेज़ो ने भारत मे एक बहुत खतरनाक कानून बना दिया| उस कानून मे ये था कि किसी भी स्थान 5 भारतीय से अधिक भारतीय इकट्ठे नहीं हो सकते| समूह बनाकर कहीं प्रदर्शन नहीं कर सकते और अगर कोई ब्रिटिश पुलिस का अधिकारी उनको कहीं इकट्ठा देख ले तो आप विश्वास नहीं कर सकते कितनी कड़ी सजा उनको दी जाती थी| उनको कोड़े से मारा जाता था और हाथो से नाखूनो तक को खींच लिया जाता था| 1882 मे भारत के क्रांतिकारी जिनका नाम था बंकिम चंद्र चटर्जी उन्होने एक गीत लिखा था जिसका नाम था वन्देमातरम| तो इस गीत को गाने पर अंग्रेज़ो ने प्रतिबंद लगा दिया और गीत गाने वालों को जेल मे डालने का फरमान जारी कर दिया| तो इन दोनों बातों के कारण लोगो मे अंग्रेज़ो के प्रति बहुत भय आ गया था|

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महाराणा प्रताप

भारतभूमि सदैव से ही महापुरुषों और वीरों की भूमि रही है | यहां गांधी जैसे शांति के दूतों ने जन्म लिया है तो साथ ही ताकत और साहस के परिचायक महाराणा प्रताप, झांसी की रानी, भगतसिंह जैसे लोगों ने भी जन्म लिया है | यह धरती हमेशा से ही अपने वीर सपूतों पर गर्व करती रही है. ऐसे ही एक वीर सपूत थे महाराणा प्रताप |

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एस. गुरुमूर्ति का लेख

वह चेन्नई से प्रकाशित होने वाले ‘न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ के २४ जनवरी के अंक में प्रकाशित हुआ है. विषय मुख्यत: भारत-पाकिस्तान के बीच चलने वाली ‘समझौता एक्सप्रेस’में, भारत में पानिपत में हुए बम विस्फोट और उसके लिए बहुत देर बाद सरकारी जॉंच यंत्रणा ने तथाकथित हिंदू आतंकवादियों को धर दबोचने के बारे में है. वह इस प्रकार है –

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वीर सावरकर कौन थे ?

१. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्वतन्त्रता के लिए क्रान्तिकारी अभियान चलाने वाले पहले भारतीय थे वीर-विनायक दामोदर सावरकर|

२. मुद्रित और प्रकाशित होने के पूर्व ही दो शासनों ने जिनकी पुस्तकें ज़ब्त घोषित कर दीं, ऐसे पहले लेखक थे स्वातन्त्र्यवीर सावरकर|

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मदन लाल ढींगरा

मदन लाल ढींगरा का जन्म सन् 1883 में पंजाब में एक संपन्न हिंदू परिवार में हुआ था। उनके पिता सिविल सर्जन थे और अंग्रेज़ी रंग में पूरे रंगे हुए थे परंतु माताजी अत्यन्त धार्मिक एवं भारतीय संस्कारों से परिपूर्ण महिला थीं। उनका परिवार अंग्रेजों का विश्वासपात्र था। जब मदन लाल को भारतीय स्वतंत्रता सम्बन्धी क्रान्ति के आरोप में लाहौर के एक विद्यालय से निकाल दिया गया, तो परिवार ने मदन लाल से नाता तोड लिया। मदन लाल को एक क्लर्क रूप में, एक तांगा-चालक के रूप में और एक कारखाने में श्रमिक के रूप में काम करना पडा। वहाँ उन्होंने एक यूनियन बनाने का प्रयास किया परंतु वहां से भी उन्हें निकाल दिया गया। कुछ दिन उन्होंने मुम्बई में भी काम किया। अपनी बड़े भाई से विचार विमर्श कर वे सन् 1906 में उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैड गये जहां ‘यूनिवर्सिटी कॉलेज’ लंदन में यांत्रिक प्रौद्योगिकी में प्रवेश लिया। इसके लिए उन्हें उनके बडे भाई एवं इंग्लैंड के कुछ राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओं से आर्थिक सहायता मिली।

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सुभाष चंद्र बोस

हमारे देश के इतिहास में ऐसा व्यक्तित्व जो एक साथ महान सेनापति, वीर सैनिक, राजनीति का अद्भुत खिलाड़ी और अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पुरुषों, नेताओं के समकक्ष साधिकार बैठकर कूटनीतिज्ञ तथा चर्चा करने वाला हो। भारत की स्वतंत्रता के लिए सुभाष चंद्र बोस ने क़रीब-क़रीब पूरे यूरोप में अलख जगाया।

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महारानी दुर्गावती

वीरांगना महारानी दुर्गावती कालिंजर के राजा कीर्तिसिंह चंदेल की एकमात्र संतान थीं. महोबा के राठ गांव में 1524 ई0 की दुर्गाष्टमी पर जन्म के कारण उनका नामदुर्गावती रखा गया. नाम के अनुरूप ही तेज, साहस, शौर्य और सुन्दरता के कारण इनकी प्रसिद्धि सब ओर फैल गयी। दुर्गावती के मायके और ससुराल पक्ष की जाति भिन्न थी लेकिन फिर भी दुर्गावती की प्रसिद्धि से प्रभावित होकर राजा संग्राम शाह ने अपने पुत्र दलपत शाह से विवाह करके, उसे अपनी पुत्रवधू बनाया था.